“जब बीजेपी के खिलाफ पार्टी लड़ाई लड़ रही तब छोड़ा साथ”: कांग्रेस नेताओं ने आजाद पर किया वार


कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने एक वीडियो संदेश में कहा है कि, ”गुलाम नबी आजाद जी को कांग्रेस ने संगठन व सरकार में अनेक बार कई पदों से नवाजा. दो बार लोकसभा सांसद बनाया, जम्मू-कश्मीर का मुख्यमंत्री बनाया. उन्हें चुनाव की हार-जीत से बचाकर पांच बार राज्यसभा सांसद बनाया. इसके बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी, मुझे इस बात का बड़ा दुख है.”

कांग्रेस के एक और दिग्गज नेता गुलाम नबी आजाद ने शुक्रवार को पार्टी का दामन छोड़ दिया. गुलाम नबी आजाद ने दिल्ली के अपने 5 एवेन्यू रोड के घर पर मौजूद रहने के बावजूद उन्होंने मीडिया से बात नहीं की, लेकिन उनकी पांच पन्नों की एक चिट्ठी ने कांग्रेस में सियासी भूचाल खड़ा कर दिया. उन्होंने पत्र में अपने राजनीतिक सफर से लेकर कांग्रेस छोड़ने तक की बातें सिलसिलेवार लिखी हैं. 

आजाद ने लिखा है – जम्मू कश्मीर में वे उस वक्त कांग्रेस में शामिल हुए जब पार्टी में खासी उथलपुथल थी. फिर यूथ कांग्रेस में संजय गांधी के साथ जेल जाने का जिक्र किया. पत्र में ये भी लिखा कि तीन दशक तक उन्होंने संजय गांधी से लेकर इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी के साथ काम किया. लेकिन 2013 में राहुल गांधी के महासचिव बनाए जाने के बाद आपसी सलाह मशवरा का दौर खत्म कर दिया गया. वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर नए लोगों की एक कोटरी तैयार हो गई. इसके चलते राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़े गए 49 में से 39 विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा. 

आजाद ने पत्र में लिखा है कि 23 वरिष्ठ नेताओं ने पत्र लिखकर कुछ सुझाव दिया था लेकिन सुझाव पर अमल न करके इन नेताओं को ही नीचा दिखाया गया. अंत में वे लिखते हैं कि कांग्रेस को भारत जोड़ो की जगह कांग्रेस को जोड़ने की कोशिश करनी चाहिए. 

गुलाम नबी आजाद से आज मिले कश्मीर के एक कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री जीएम सरूरी ने आजाद के बारे में कहा कि, ”वे बहुत बड़ा सताए हुए नेता हैं. कांग्रेस को बहुत कुछ दिया. पांच पन्नों पर उन्होंने अपना इतिहास लिखा है. उसे पढ़ें और देखें कि क्या होता है, जब उनकी बात पर अमल ना किया जाए, उनका तिरस्कार किया जाए. तो उसकी वजह यही है कि इंसान मजबूर होता है नया कदम उठाने के लिए.”

लेकिन गुलाम नबी आजादी की चिट्ठी मीडिया में आने के बाद कांग्रेस ने भी पलटवार किया. पहले पहले अजय माकन और जयराम रमेश ने गुलाम नबी आजाद को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आज जब कांग्रेस बीजेपी के खिलाफ मंहगाई, बेरोजगारी और ध्रुवीकरण के मुद्दे पर सबसे ज्यादा लड़ रही है तब गुलाम नबी का साथ छोड़ना दुर्भाग्यपूर्ण है.

अजय माकन ने कहा, गुलाम नबी आजाद कई महत्वपूर्ण पदों पर पार्टी और सरकार में रहे लेकिन इस वक्त जब कार्यकर्ताओं के साथ उनको खड़े होना चाहिए, तब उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दिया है. खुद गुलाम नबी आजाद के साथ G 23 में रहे नेताओं ने भी उनकी आलोचना की. संदीप दीक्षित ने पत्र लिखकर कहा कि, ”हमने रिफार्म की बात कही थी, रिवोल्ट की नहीं.” 

यही नहीं गुलाम नबी आजाद पर बीजेपी से निकटता बढ़ाने के आरोप भी लगे. जयराम रमेश ने ट्वीट करके कहा कि, ”जिस व्यक्ति को कांग्रेस नेतृत्व ने सबसे ज़्यादा सम्मान दिया, उसी व्यक्ति ने कांग्रेस नेतृत्व पर व्यक्तिगत आक्रमण करके अपने असली चरित्र को दर्शाया है. पहले संसद में मोदी के आंसू, फिर पद्म विभूषण, फिर मकान का एक्सटेंशन… यह संयोग नहीं सहयोग है.”

फिलहाल ये इत्तफाक है या सोची समझी रणनीति कि गुलाम नबी आजाद ने उस वक्त इस्तीफा दिया है, जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और  राहुल गांधी दोनों देश से बाहर हैं.  

गुलाम नबी आजाद की नाराजगी कांग्रेस में किसी से छिपी नहीं है लेकिन पांच पन्ने की उनकी चिट्ठी में जिस तरह उन्होंने कांग्रेस के लिए अपने त्याग और राहुल गांधी पर तीखा तंज किया है वह कांग्रेस के पुराने नेताओं के लिए भी बड़े झटके से कम नहीं है. एक के बाद अंदरूनी झटके झेल रही कांग्रेस के लिए यह वक्त बड़ी चुनौतियों भरा है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने पार्टी से दिया इस्तीफा





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