झारखंड : मोबाइल फोन की रोशनी में हुआ बिजली गिरने से घायल मरीज का इलाज, VIDEO वायरल


रांची:

हजारीबाग के कटकमसांडी प्रखंड के आराभुसाई पंचायत के ग्राम महूंगाय निवासी सागर कुमार यादव (22 साल) को वज्रपात का झटका लगा. उनको गुरुवार को देर शाम ट्रामा सेंटर के इमरजेंसी वार्ड में लाया गया और उनका ईसीजी मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में किया गया. घटना का वीडियो वायरल होने के बाद इसको लेकर विवाद शुरू हो गया है. हजारीबाग जिला प्रशासन ने वायरल वीडियो के संबंध में जांच करने के लिए एक समिति का गठन किया है. 

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वीडियो में दिखाया गया है कि हजारीबाग मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (HMCH) में बिजली की चपेट में आए एक व्यक्ति का कथित तौर पर मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में इलाज किया गया. बिजली कटौती के दौरान इस तरह से इलाज किया गय़ा. हालांकि अस्पताल प्रशासन ने इस आरोप से इनकार किया कि मरीज का मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में किया जा रहा था. उसने इसे झूठा करार दिया है.

हजारीबाग जिले के कटकमसांडी प्रखंड के अरघुसाई गांव के निवासी सागर कुमार गुरुवार की शाम को बिजली गिरने से घायल हो गए. उन्हें एचएमसीएच लाया गया और उसी रात उन्हें इलाज के लिए अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया. ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने मरीज का ईसीजी कराने का निर्देश दिया. इस दौरान अस्पताल की बिजली गुल हो गई.

हजारीबाग के विधायक मनीष जायसवाल के सचिव रंजन चौधरी ने एक वीडियो शूट किया, जिसमें कथित तौर पर दिखाया गया है कि मरीज का बिजली कटौती में मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में इलाज किया जा रहा है. इस वीडियो को सोशल मीडिया पर डाल दिया गया. चौधरी ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन को सूचना देने के बावजूद बिजली बहाल नहीं की गई.

उन्होंने कहा कि वहां एक शक्तिशाली डीजल जनरेटर सेट लगाया गया है ताकि मरीजों को आपातकालीन सेवाएं प्रदान की जा सकें. इसके अलावा, बिजली संकट से निपटने के लिए मेडिकल कॉलेज में 50 लाख रुपये का सोलर प्लांट भी लगाया गया है, लेकिन यह महीनों से खराब पड़ा हुआ है.

हजारीबाग की उपायुक्त नैंसी सहाय ने कहा, ”मैंने इस संबंध में एसडीओ हजारीबाग विद्या भूषण कुमार की अध्यक्षता में दो सदस्यीय जांच समिति का गठन पहले ही कर लिया है. रिपोर्ट मिलने के बाद ही हम कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे. सोशल मीडिया के जरिए वायरल किए गए वीडियो के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती. 

इस बीच, एचएमसीएच हजारीबाग के उपाधीक्षक डॉ एके सिंह ने मोबाइल और टॉर्च की रोशनी में मरीज का इलाज किए जाने के आरोपों से इनकार किया. उन्होंने कहा कि जनरेटर सेट को चालू होने में पांच से सात मिनट का समय लगता है. जनरेटर से बिजली बहाल करने के बाद मरीज का ईसीजी कराया गया और उसके बाद डॉक्टरों ने मरीज को देखा. सिंह ने कहा कि मरीज की हालत स्थिर है लेकिन बेहतर इलाज के लिए उसे रांची के रिम्स रेफर कर दिया गया है.





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